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5/31/2021

6:32:00 pm

Inspirational stories / Irshya , Krodh Aur Apamaan


Irshya , Krodh Aur Apamaan

Inspirational stories / Irshya , Krodh Aur Apamaan


tokiyo ke nikat ek mahaan zen maastar rahate the , vo ab vrddh ho chuke the aur apane aashram mein zen buddhizm kee shiksha dete the .

ek naujavaan yoddha , jisane kabhee koee yuddh nahin haara tha ne socha kee agar main maastar ko ladane ke lie ukasa kar unhen ladaee mein hara doon to meree khyaati aur bhee fail jaayegee aur isee vichaar ke saath vo ek din aashram pahuncha .

“ kahaan hai vo maastar , himmat hai to saamane aaye aur mera saamana kare .”; yoddha kee krodh bharee aavaaz poore aashram mein goonjane lagee .

dekhate -dekhate sabhee shishy vahaan ikaththa ho gae aur ant mein maastar bhee vaheen pahunch gae .
unhen dekhate hee yoddha unhen apamaanit karane laga , usane jitana ho sake utanee gaaliyaan aur apashabd maastar ko kahe . par maastar phir bhee
chup rahe aur shaantee se vahaan khade rahe .
bahut der tak apamaanit karane ke baad bhee jab maastar kuchh nahin bole to yoddha kuchh ghabaraane laga , usane socha hee nahin tha kee itana sab kuchh sunane ke baad bhee maastar use kuchh nahin kahenge …usane apashabd kahana jaaree rakha , aur maastar ke poorvajon tak ko bhala-bura kahane laga …par maastar to maano bahare ho chuke the , vo usee shaantee ke
saath vahaan khade rahe aur antatah yoddha thak kar khud hee vahaan se chala gaya .

usake jaane ke baad vahaan khade shishy maastar se naaraaj ho gae , “ bhala aap itane kaayar kasee ho sakate hain , aapane us dusht ko dandit kyon nahin kiya , agar aap ladane se darate the , to hamen aadesh diya hota ham use chhodate nahin !!”, shishyon ne ek svar mein kaha .


maastar muskuraaye aur bole , “ yadi tumhaare paas koee kuchh saamaan lekar aata hai aur tum use nahin lete ho to us saamaan ka kya hota hai ?”

vo usee ke paas rah jaata hai jo use laaya tha .”, kisee shishy ne uttar diya .

“ yahee baat irshya , krodh aur apamaan ke lie bhee laagoo hotee hai .”- maastar bole . “ jab inhen sveekaar nahin kiya jaata to ve usee ke paas rah jaatee hain jo unhen lekar aaya tha .”





5/25/2021

7:41:00 am

Motivational story In Hindi//वृद्ध सन्यासी और जड़ी-बूटी


            वृद्ध सन्यासी और  जड़ी-बूटी 
वृद्ध सन्यासी  और   जड़ी-बूटी

बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी. एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी , ” बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था , लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है ठीक से बात तक नहीं करता .”

” युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है.” , सन्यासी बोला.

” लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है , कृपया आप मुझे वो जड़ी-बूटी दे दें.” , महिला ने विनती की.

सन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला ,” देवी मैं तुम्हे वह जड़ी-बूटी ज़रूर दे देता लेकिन उसे बनाने के लिए एक ऐसी चीज चाहिए जो मेरे पास नहीं है .”

” आपको क्या चाहिए मुझे बताइए मैं लेकर आउंगी .”, महिला बोली.

” मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए .”, सन्यासी बोला.

अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी , बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा , बाघ उसे देखते ही दहाड़ा , महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी.

अगले कुछ दिनों तक यही हुआ , महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती. महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता. अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता. उनकी दोस्ती बढ़ने लाफि और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी. और देखते देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया.

फिर क्या था , वह बिना देरी किये सन्यासी के पास पहुंची , और बोली
” मैं बाल ले आई बाबा .”

“बहुत अच्छे .” और ऐसा कहते हुए सन्यासी ने बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया

” अरे ये क्या बाबा , आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया ……अब मेरी जड़ी-बूटी कैसे बनेगी ?” महिला घबराते हुए बोली.

” अब तुम्हे  किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है .” सन्यासी बोला . ” जरा सोचो , तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया….जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ? जाओ जिस तरह तुमने बाघ को अपना मित्र बना लिया उसी तरह अपने पति के अन्दर प्रेम भाव जागृत करो.”

महिला सन्यासी की बात समझ गयी , अब उसे उसकी जड़ी-बूटी मिल चुकी थी.

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2/20/2021

8:20:00 am

Inspirational stories// गुरु दक्षिणा

  गुरु दक्षिणा

एक बार की बात है जब गुरु जी अपनी धयान में बैठे थे तभी एक सिष्य  आकर गुरु जी से पूछता है की गुरु जी क्या जीवन एक संघर्ष है , खेल है या फिर जीवन को एक उत्स्व माना  जाय |

इन तीनो  में से जीवन क्या है|  गुरु जी थोड़ा सोचते हुए बोले बच्चो जिस व्यक्ति  को गुरु नहीं मिला उसका जीवन संघर्ष है, जिन्हे गुरु का ज्ञान  प्राप्त हो गया उसका जीवन खेल है और जो लोग गुरु के बताय रास्ते  पर चलते है उनका जीवन उत्स्व है |

गुजी का उत्तर  पाने के बाद  भी बच्चे खुस नहीं हुए तब गुजी को एहसास हुआ की बच्चो को मेरी बात समझ नहीं आई|  गुरु जी सभी बच्चे को पास बुला कर बैठाते  है बोलते है की में आज तुम सब को एक कहानी सुनाता हु |

एक समय की बात है एक गुरु कुल में चार शिष्यों  की जब शिक्षा सम्पूर्ण हुए तो उन्हों ने अपने गुरु से प्राथना की की आप बताय की आप को गुरुदाक्षिणा में क्या चाहिए | 

गुरु जी मंद-मंद मुस्कराये और फिर बड़े स्नेहपूर्वक कहने लगे मुझे गुरुदाक्षिणा में मुझे एक थैला भर के सुखी पतिया चाहिए क्या तुम सब ला सकोगे ? वे चारो मन ही मन बहुत खुश हुए क्योंकि उन्हें लगा यह बहुत आसान काम है और वे अपने गुरुजी की इच्छा पूरी कर सकेंगे।

उन्हें लगा कि सुखी पत्तियां जंगल में बिखड़ी पड़ी रहती है और वह आसानी से ला पाएंगे वे गुरु जी से आज्ञा लेकर सुखी पत्तियां लेने जंगल में निकल पड़ते हैं।

अब चारों दोस्त चलते-चलते जंगल के समिप पहुंचते हैं  और वहां पहुंच कर आश्चर्य में पड़ जाते हैं कि वहां तो दूर- दूर तक स उसे सुखी पत्तियो का नाम निसान नहीं था। वे सब सोच में पड़ गए की जंगल से सुखी पत्तियां कहा गए।

वे जब आपस में बात कर रहे थे तब वहां से आदमी गुजर रहा था वह एक किसान था वे चारो उस किसान से विनती करने लगे कि वह उन्हें एक थैली सुखी पत्तियां दे दे।

किसान ने उनसे क्षमा मांगते हुए कहा कि उसने उस सुखी पत्तियों का प्रयोग ईधन के रूप में पहले ही कर लिया है।इस कारण वह मदद नहीं कर पाएगा।

वे चारों एक गांव में पहुंचे और वहां एक व्यपारी से प्राथना की की हमें एक थैली सुखी पत्तियां दे लेकिन उस व्यपारी ने क्षमा मांगते हुए कहा कि पहले ही कुछ पैसे कमाने के लिए सुखी पत्तियों के दोने बनाकर बेच दिए थे लेकिन उस व्यापारी ने उदारता दिखाते हुए उन्हें एक बूढी माँ का पता बताया जो सूखी पत्तियां एकत्रित किया करती थी|पर भाग्य ने यहाँ पर भी उनका साथ  नहीं दिया क्योंकि वह बूढी माँ तो उन पत्तियों को अलग-अलग करके कई प्रकार की ओषधियाँ बनाया करती थी 

|अब उदास होकर वे चाारो खाली हाथ ही गुरु जी के पास लौट गये |गुरु जी ने उन्हें देखते ही स्नेहपूर्वक पूछा- ‘बच्चो ले आये गुरुदक्षिणा ?’तीनों ने सर झुका लिया |गुरू जी द्वारा दोबारा पूछे जाने पर उनमें से एक शिष्य कहने लगा- ‘गुरुदेव,हम आपकी इच्छा पूरी नहीं कर पाये |हमने सोचा था कि सूखी पत्तियां तो जंगल में सर्वत्र बिखरी ही रहती होंगी लेकिन बड़े ही आश्चर्य की बात है कि लोग उनका भी कितनी तरह से उपयोग करते हैं 

|’गुरु जी फिर पहले ही की तरह मुस्कराते हुए प्रेमपूर्वक बोले-‘निराश क्यों होते हो ?प्रसन्न हो जाओ और यही ज्ञान कि सूखी पत्तियां भी व्यर्थ नहीं हुआ करतीं बल्कि उनके भी अनेक उपयोग हुआ करते हैं; मुझे गुरुदक्षिणा के रूप में दे दो |’ चारो शिष्य गुरु जी को प्रणाम करके खुशी-खुशी अपने-अपने घर की ओर चले गये |

वह शिष्य जो गुरु जी की कहानी पुरे मन से सुन रहा था,अचानक बड़े उत्साह से बोला-‘गुरु जी,अब मुझे अच्छी तरह से ज्ञात हो गया है कि आप क्या कहना चाहते हैं |आप का  संकेत, वस्तुतः इसी ओर है न कि जब सर्वत्र सुलभ सूखी पत्तियां भी निरर्थक या बेकार नहीं होती हैं तो फिर हम कैसे, किसी भी वस्तु या व्यक्ति को छोटा और महत्त्वहीन मान कर उसका तिरस्कार कर सकते हैं?चींटी से लेकर हाथी तक और सुई से लेकर तलवार तक-सभी का अपना-अपना महत्त्व होता है |

’गुरु जी भी तुरंत ही बोले-‘हाँ, पुत्र,मेरे कहने का भी यही तात्पर्य है कि हम जब भी किसी से मिलें तो उसे यथायोग्य मान देने का प्रयास करें ताकि आपस में स्नेह, सद्भावना,सहानुभूति एवं सहिष्णुता का विस्तार होता रहे और हमारा जीवन संघर्ष के बजाय उत्सव बन सके |

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 दूसरे,यदि जीवन को एक खेल ही माना जाए तो बेहतर यही होगा कि हम  निर्विक्षेप,स्वस्थ एवं शांत प्रतियोगिता में ही भाग लें और अपने निष्पादन तथा निर्माण को ऊंचाई के शिखर पर ले जाने का अथक प्रयास करें |’अब शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट था |

शिक्षा ; इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की किसी भी वस्तु या व्यक्ति को कभी भी व्यथय नहीं समझना चाहिए चीज का अपना एक महत्व होता है |

1/13/2020

4:58:00 pm

Inspirational stories / सबसे बड़ी समस्या

सबसे बड़ी समस्या

 Inspirational stories सबसे बड़ी समस्या


बहुत समय पहले की बात है एक महा ज्ञानी पंडित हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहते थे। लोगों के बीच रहकर वह थक चुके थे और अब ईश्वर भक्ति करते हुए एक सादा जीवन व्यतीत करना चाहते थे। लेकिन उनकी प्रसिद्धि इतनी थी कि लोग दुर्गम पहाड़ियों पर भी नदी झरनो को पार करते हुए उनसे मिलने पहुंच जाते थे। उनका मानना था कि यह विद्वान उनकी हर समस्या का समाधान कर सकते हैं।

इस बार भी कुछ लोग उन्हें ढूंढ़ते हुए उनकी कुटिया तक आ पहुंचे। पंडित जी ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा।
तिन दिन बीत गए, अब और भी लोग वहां पहुंच गए और जब लोगों के लिए जगह कम परने लगी तो पंडित जी ने कहा “ आज मैं सभी के प्रश्नो का उत्तर दुंगा”  पर आपको एक वचन देना होगा कि यहां से जाने के बाद आप किसी और को इस स्थान के विषय में नहीं बताएंगे ताकि आज के बाद मैं एकांत में बैठकर अपनी साधना पुरी कर सकू।

चलिए अपनी- अपनी समस्या बताइए


यह सुनते ही किसी ने अपनी परेशानी बतानी शुरू कि लेकिन वह अपनी कुछ शब्द ही बोल पाया कि बीच में किसी और ने अपनी बात शुरू कर दी सभी जानते थे कि आज के बाद पंडित जी से फिर कभी बात करने का मौका नहीं मिलेगा इसलिए वे सब जल्दी- जल्दी अपनी बात रखना चाहते थे।

कुछ ही देर में वहां का दृश्य मछली बाजार जैसा हो गया अतः पंडित जी को चीख कर बोलना पड़ा “ कृप्या शांत हो जाए” ।अपनी- अपनी समस्या एक पर्ची में लिखकर मुझे दिजिए।सभी ने अपनी- अपनी समस्या लिखकर पंडित जी को दे दिया। पंडित जी ने सभी पर्ची को एक कटोरी में डालकर मिला दिया और कहा इस कटोरी को एक- दुसरे के पास किजिए ।

हर व्यक्ति इस कटोरी से एक पर्ची उठाएगा उसके बाद उसे निर्णय लेना होगा कि क्या वो अSपनी समस्या को इस समस्या से बदलना चाहता है?

हर व्यक्ति एक पर्ची उठाता, उसे पढ़ता और सहम जाता एक- एक कर के सभी ने पर्चीयां देख ली पर कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या के बदले किसी और कि समस्या लेने को तैयार नहीं हुआ।

सभी की यही सोच थी कि उनकी समस्या चाहे कितनी भी बड़ी क्यो न हो दुसरे की समस्या जितनी गंभीर नहीं है कुछ देर बाद सभी अपनी अपनी पर्ची लेकर वापस लौटने लगे। वे खुश थे कि उनकी समस्या उतनी बड़ी भी नहीं है कि जितना वे सोचते थे।

दोस्तों ऐसा कौन होगा जिसकी life  मे कोई problem न हो? हम सभी के जीवन में समस्या है । हमे इस बात को accept करना चाहिए की  life है तो छोटी- बड़ी समस्याएं आती रहेंगी। ऐसे में दुखी होकर उसी के बारे में सोचने से अच्छा है कि हम अपना ध्यान उसके निवारण मे लगाए।

हमें लगता है कि सबसे बड़ी समस्या हमारी ही है पर यकीन किजिए दुनिया में लोगों के पास इतनी बड़ी  बड़ी समस्या है कि हमारी तो उसके सामने कुछ भी नहीं है।

इसलिए ईश्वर ने जो दिया है उसके लिए ईश्वर का धन्यवाद किजिए और खुश रहने की कोशिश किजिए।

5/28/2019

8:38:00 pm

Inspirational stories / तीन विकल्प

तीन विकल्प


Inspirational stories / तीन विकल्प


बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में एक किसान रहता था उस किसान की एक बहुत सुंदर बेटी थी। दुर्भाग्यवश गांव के जमींदार से उसने बहुत सारा कर्ज ले लिया था । जमिंदार बूढ़ा और कुरूप था।


किसान की सुंदर बेटी को देखकर सोचा क्यूं न कर्जे के बदले किसान
के सामने मैं उसकी बेटी से शादी का प्रस्ताव रखूं।

जमिंदार किसान के पास गया और उसने कहा तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे साथ कर दो बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज माफ कर दूंगा।
जमिंदार की बात सुनकर किसान की और उसकी बेटी के होश उड़ गए। तब जमिंदार ने कहा चलो गांव की पंचायत के पास चलते है वो
जो भी फैसला लेंगे वो हम दोनों को मानना पड़ेगा।

वे लोग पंचायत के पास जाकर अपनी सारी बात सुनाई उनकी बात सुनकर पंचायत ने थोडा सोच विचार कर कहा

यह मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम इसका फैसला किसमत पर छोड़ते है। जमिंदार सामने पड़े सफ़ेद और काले पड़े रोड़ो के ढेर से एक काला और एक सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैली में रख देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले से एक रोड़ा उठाएगी, और उस आधार पर उसके पास तिन विकल्प होंगे:-

१) अगर वह काला रोड़ा उठाती हैं तो उसे जमिंदार से शादी करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ कर दिया जाएगा।

२) अगर वह सफ़ेद पत्थर उठाती हैं तो उसे जमिंदार से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ कर दिया जाएगा।

३) अगर लड़की पत्थर उठाने से मना करती है तो उसके पिता को जेल भेज दिया जाएगा।

पंचायत के आदेश के अनुसार जमिंदार झुका और उसने दो पत्थर उठा लिया। जब वह पत्थर उठा रहा था तब किसान की बेटी ने देखा कि उसने चुपके से दोनों ही काले पत्थर उठाए है और थैली में डाल दिया है।

लड़की इस स्थिति से घबराए बिना सोचने लगी कि वह इस परिस्थिति से निपटने के लिए क्या कर सकती हैं

१) वह पत्थर उठाने से मना कर दें और पिता को जेल जाने दे।

२) सबको बता दें कि जमिंदार ने दोनों काले पत्थर उठाए हैं और धोखा दे रहा है।

३) वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले और अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए शादी कर ले।

यह सोचते- सोचते तभी उसके मन में एक अच्छा उपाय सुझा उसनेे थैले में अपना हाथ डाला और एक पत्थर अपने हाथ में ले लिया और बिना पत्थर की तरफ देखे उसे फिसलने का नाटक किया उसका पत्थर अब हजारों पत्थर के ढेर में जा गिरा था।

लड़की ने कहा:- मैं कितनी लापरवाह हुं जो मुझसे यह पत्थर निचे गिर गया। लेकिन कोई बात नहीं आप थैले के अंदर देख लिजिए कि कौन सा पत्थर बचा हुआ है, तब आपको पता चल जाएगा कि मैंने कौन सा पत्थर उठाया था जो मेरे हाथ से गिर गया।

थैले में काला पत्थर था तो सभी ने मान लिया कि लड़की ने सफ़ेद रंग का पत्थर उठाया था। जमिंदार के भीतर इतना साहस नहीं था कि वह अपनी चोरी मान ले। लड़की ने अपनी समझ से असंभव को संभव कर दिखाया।

दोस्तों  हमारे जीवन में भी  कई बार ऐसी परिस्थिति आति है जहां सब कुछ धुंधला दिखाई देता है, हर रास्ता नाकामयाबी की ओर जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में हम परमपरा से हट कर सोचने का प्रयास करे तो उस लड़की की तरह अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं।



5/13/2019

5:25:00 pm

Motivational Stories / परिस्थितियों से समझौता

                         Motivational Stories 



१ ) परिस्थितियों  से समझौता 

Motivational Stories / परिस्थितियों  से समझौता

दोस्तों  आज हम एक ऐसी कहानी बताने जा रहे है जिसको पढ़ने के बाद आपको ज्ञात होगा की हमे अपने परिस्थितियों का कैसे सामना करना चहिये न की उस परिस्थिति से समझौता करना चहिये | 

एक समय की बात है एक कक्षा में एक अध्यापक कुछ बच्चों  को समझा रहे थे की हमे समय रहते अपनी रक्षा करनी चहिये | 

अध्यापक ने एक बर्तन में पानी भर कर लाया और उसमे एक मेढ़क  को उस पानी में  छोर  दिया  मेढक उस पानी में आनंद से खेलने लगा |  कुछ समय बीतने के बाद अध्यापक ने उस पानी को गर्म किया |  

जब पानी गर्म हुआ तो मेढक ने उस गर्म पानी के अनुशार अपने आप को ढल लिया |

कुछ समय बीतने के बाद फिर से अध्यापक ने उस पानी को गर्म किया लेकिन उस मेढक ने फिर से  गर्म पानी के तापमान में अपने आप को ढाल   लिया |  उस मेढक ने अपने  आप को  उस गर्म निकालने  पानी से निकलने की कोशिश नहीं की बल्कि जैसे -जैसे  पानी गर्म  होते गया  मेढक  पानी के बढ़ते तापमान के अनुशार अपने आप को  ढाल  लेता | 

मेढक की शरीर की संरचना  यानि बनावट  ऐसी होती है की वह की तापमान कैसी भी हो वह अपने आप को उस तापमान के अनुशार ढाल  लेता है |  अध्यापक ने पानी गर्म करने की इस क्रिया को तीन चार बार  और किया  लेकिन मेढक ने फिर से अपने आप को ढाल  लिया | 

अतः  अंत में एक समय ऐसा  आया जब मेढक को उस पानी का तापमान नहीं  सहा  जा सका और मेढक उसी ड्रम पानी में अपना दम  तोर दिया | 

मेढक की मौत का कारण  अद्यापक  या गर्म पानी नहीं था बल्कि ओह मेढक  खुद  था | अगर  जब पहली बार पानी  गर्म हुआ उसी समय मेढक उस पानी से उछल  जाता तो ओह आज जिन्दा रहता  लेकिन मेढक ने अपनी 
सारी  सकती का उपयोग गर्म पानी में  अर्जेस्ट  करने में लगा दी | 

लेकिन जब उस पानी का तापमान ओह नहीं सह  सका और निकलने की कोशिश की तब तक  उसकी सारी 
सक्ति  ख़त्म हो चुकी थी जिस कारण ओह पानी से छलांग नहीं लगा सका | 

इसी  प्रकार  हमारे जीवन में भी कइ प्रकार की  परेशानिया आती है और अगर हम उस परिस्थिति में अर्जेस्ट करने लगे  तो हम उस परिस्थिति से कभी नहीं निकल पाएंगे और हमारा समय खत्म हो जाएगा  अतः  अंत में हमे  पछताना पर सकता है अतः  समय रहते हमे उस परिस्थिति से निकलने का उपाय खोज लेना चाहिए और 
अपने भविष्य को बचना चाहिए | 


इस कहानी से हमे यह पता चलता है की हर समस्या का हल परिस्थितियों  से समझौता करना   है |